बयान : मैं निजी रूप से लोकपाल के दायरे में आने को तैयार हूं. पर मेरी निजी राय का कोई मतलब नहीं है. यह फैसला मंत्रिमंडल को करना है. -डॉक्टर मनमोहन सिंह, प्रधानमंत्री
मनमोहन सिंह. फाइल फोटो
तड़का : अगर मेरी निजी राय मानी जाती तो इतना हल्ला ही नहीं होता, जितना कि अब हो रहा है.
बयान: 2008 में सरकार के विश्वास मत के दौरान कोई खरीद-फरोख्त नहीं हुई. कम से कम मेरी जानकारी में तो ऐसा बिलकुल नहीं है. -प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, ईमानदार
तड़का:और क्या-क्या जानकारियां आपको नहीं हैं, जरा उनसे भी तो रूबरू करा दीजिए।